top of page

मिक्की दा ब्याह !!

  • टी रजनीश
  • May 16, 2023
  • 3 min read

सुधीर व मीनू सूद के बड़े बेटे मिक्की उर्फ़ मुकुल दा ब्याह १५ फ़रवरी नू हो गया, बैंड बाजे बारात, झाड़ फ़ानूस के साथ शादी चंडीगढ़ के एक रेसोर्ट में हुई , लड़की वाले फ़िरोज़पुर के हैं, मतलब बाप बेटे की ससुराल एक शहर में है, ज्यादा मत ढूँढिये ~ करमचंद बन कर ,ये महज़ इत्तेफाक है , वैसे ये भी बता देता हूँ मिक्की ने ग्यारह बारह क्लास वहीं से पढ़ा है और फिर इंजीनियर भी वही के कॉलेज से बना !


सुधीर फ़ौज से ब्रिगेडियर रिटायर हुए हैं और पढ़े लिखे सैनिक स्कूल में, मतलब नेक्कर के बाद का बचपन ,पूरी जवानी, बालों के खिचड़ी बनने तक का समय फ़ौज को गिफ़्ट कर दिया उन्होंने, अपने शौक़ से , दिल से , जज़्बात से ! बड़े सुलझे हुए, व्यावहारिक ,नींद में भी डिसीपलिन में सोने वाले एकदम निःसन्देह जेन्टलमैन आफ़िसर हैं सुधीर सर .।! ख़ैर उनके बेटे की शादी थी तो समय से लेह से हैदराबाद , कोच्चि , सुखना से रायपुर तक कार्ड बँट गए और स्टाफ़ काँलेज की सिखलाई के तौर पर फैलो अप शुरू हो गया, और चला जब तक की कन्फरमेशन नहीं मिल गया.. ३५ साल की सर्विस और व्यवहार कुशलता के अप्रतिम मिसाल सूद सर को बहुतों से निराश नहीं होना पड़ा !! पर इन सब में मैडम(मीनू सूद) के योगदान की नहीं बात करें तो ग़लत होगा , ज्यादा कुछ नहीं कहूँगा बस इतना समझ लिजे की ७० फ़ीसद तो सिर्फ मुस्कराहट से जंग जीती है उन्होनें, बाकी के लिए सूद साहब के साथ कंधा से कंधा मिलाया है !


चौदह को संगीत और पन्द्रह को शादी: परोग्राम यही था पर यक़ीन मानिए तेरह से शुरू होकर १६ सुबह तक हर पल संगीत और हर पल फेरे हो रहे थे ,यादों के मुलाक़ातों के, बरेली की बातों का, सुखना के सुख, जम्मू के दुख और बच्चों और कमर के घेरे के बड़े होने का ! इस सब के बीच मिक्की और छोटू आते जाते हैलो हाय गुडमार्निग गुडभिनींग कर हाल चाल पूछ कर दाएँ बायें होकर हौले से मुस्करा निकल लेते , मानो कह रहे हो ,सब एक ही जैसे हैं फ़्रोज़न इन टाईम फ़्रेम टाइप क्योकी हर कोई बरबस उनके नेक्कर के दिनों को याद करने लगता !


शहर चंडीगढ़ मशहूर है अपने जलवे व जलाल, दिखावे के कमाल के लिए ,जहाँ लोग गाड़ी के नंबर के लिए गाड़ी से ज्यादा रक़म देने को तैयार रहते हैं, ऐसे शहर में अपनापन प्रेम से लबालब,स्नेह भरा स्वागत और सत्कार अनवरत चल रहा था ! रंगो का, तरंगों का 😜 बेमिसाल मिलन था हर कोने में , कही जारजेट, कही सिल्क, कहीं काथा, कहीं बनारसी ,कही स्लीबलेस तो कही स्वेटर मफ़लर , टाई कोट, जैकेट , सत्तर से सत्रह के फौजी गेस्ट्स के परिधान बसंतर इन्कलेव में बसंत लेकर उतर आए थे ! सुबह के नाश्ते को छोड़ दें तो बाकी हर वक्त काला कुत्ता और किंगफ़िशर एक भरोसेमंद हमसफ़र का साथ निभा रहा था, इवेंट दर इवेंट ! ढोल की थाप वाले धुनों की तो क्या कहना बच्चे तो बच्चे सारे पैतालीस पार वालों के पैर थिरक रहे थे व अरमान मचल रहे थे , नतीजन लंडन ठुमकता गीत बजा नहीं की डीजे वाले बाबू की तो शामत आ गई और डाँस फ़्लोर रौनक़ें अफ़रोज़ हो गया ~ फ़रमान जारी हो गया , चलो जी परे हटो अब फौजी आ गएने ! नाँच गाना , फ़ोटो सोटो, पप्पी झप्पी और खाना पीना यही तो रस्मों रिवाज है आजकल के हमारे ब्याह शादी आदी के फनशंन का ! पार्टी के आख़िरी पड़ाव पर लोग टूट पड़े चाइनीज़ इटैलियन मुग़लई और देशी पंजाबी ज़ायक़ेदार पकवानों से अपनी मिज़ाज पुरसी करने में , मजा आ गया गुलाब जामुन का ओल्ड माँक रम में तड़का देखकर, स्वाद लाजवाब , बनाने का अंदाज कयामत !


समय क्यों नहीं रूकता ~ यह शाश्वत प्रश्न मैं हमेशा करता हूँ अपने से और लोगों से भी , पर सोचिए अगर समय रूकता तो क्या मिक्की की शादी होती ? क्या हम सब चारों कोनों से आकर मिलते , कंपनी कमाडरो, सी ओ साहबों की बिना बात लेते और चाइना से लेकर कश्मीर की वीर गाथाओं के अपने ख़ज़ाने को खंगाल कर तरोताज़ा कर फिर से नए से सहेज पाते ? तो चलने दीजिए समय को और चलिए उसके साथ ~ हर्ष, कुनाल ,मोनी, नेहा या नानू की शादी मे शहर दर शहर अपने पुराने यारों से मिलने , कुछ हँसने ,कुछ सजने, बचे बालों को तसल्ली से सवारने और खपरैल वाली या बरेली वाली की कोई कहानी याद करने !


देखो भूल गया ना : उम्र का असर होने लगा ~ सगुन तो दिया ही नही, "दूधों नहाओ पूतों फलो ~मिक्की ते मिक्की दी वोट्टी " !बाकी फिर मिलेंगे अगली शादी में !


थैंक्यू सूद सर एन मैम फ़ार एवरी थींग ... लव या लोडस :-))

Comments


bottom of page